Monday, October 31, 2011

Aankhon me neend nahin

आँखों में नींद नहीं
कल के सुबह की कोई उम्मीद नहीं
यूँ जो देखता हु दूर तक
किसी की तस्वीर भी नहीं
ये रात है और दूर तक फैला सन्नाटा
किसी के आने की आहट भी नहीं
थक कर के जो ये पलके सो गए
किसी हसीन सपने की जरुरत भी नहीं
फिर से कल ज़िन्दगी की नयी भोर होगी
फिर रात से डरने की घबराहट भी नहीं


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